Wednesday, September 17, 2025

बजाज बानाना कुरीफ्तु - बाबो गया: An excerpt from an AI novel generator

शहर की आपाधापी से दूर, एक छोटे से क़स्बे में, जहाँ समय की गति थोड़ी धीमी थी, रिया की दुनिया अपने बाबो के इर्द-गिर्द घूमती थी। बाबो, जिसका असली नाम तो रमेश था, लेकिन रिया के लिए वो बस 'बाबो' थे – एक चलता-फिरता कहानियों का पिटारा, एक भरोसेमंद दोस्त और दुनिया की सबसे अच्छी जादू की पुड़िया।

जिस दिन बाबो नहीं रहे, उस दिन रिया की दुनिया बिखर गई। वो बस चले गए थे, जैसे हवा में उड़ता कोई पत्ता अचानक शांत हो जाए। कोई बीमारी नहीं, कोई बड़ी उम्र का हिसाब नहीं, बस एक सुबह वो बिस्तर पर नहीं थे, और उनकी छोटी सी डायरी खुली मिली थी। उस पर मोटे अक्षरों में लिखा था:


बजाज बानाना कुरीफ्तु – बाबो गया

पूरा परिवार हैरान था। "बजाज बानाना कुरीफ्तु?" यह क्या था? किसी को कुछ समझ नहीं आया। माँ ने कहा, "शायद बुढ़ापे में कुछ उलूल-जुलूल लिख दिया होगा।" चाचा ने कहा, "शायद कोई पुराना मज़ाक था, जो हम भूल गए।" पर रिया जानती थी, बाबो ऐसे नहीं थे। उनके हर शब्द का कोई अर्थ होता था, भले ही वो कितना भी अजीब लगे।

रिया के दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक बेतरतीब वाक्य नहीं था, यह बाबो की आखिरी पहेली थी, उनका आखिरी अलविदा। उसने फैसला किया कि वह इसका मतलब जानेगी।

पहला शब्द था 'बजाज'। रिया को तुरंत याद आया बाबो का पुराना स्कूटर। एक गहरा नीला बजाज चेतक, जिसने न जाने कितने मीलों का सफर तय किया था। बाबो को उस स्कूटर से प्यार था। वह हर सुबह उसे कपड़े से चमकाते, उससे बातें करते, जैसे वह कोई जीवित प्राणी हो। रिया दौड़कर गैरेज में गई। स्कूटर धूल से सना था, उदास खड़ा था। रिया ने उसे छुआ, उसकी पुरानी सीट पर हाथ फेरा। अचानक, उसकी नज़र स्कूटर की डिक्की पर पड़ी। वो हमेशा खुली रहती थी, लेकिन आज वह बंद थी। ताला लगा था, जो बाबो की चाबियों के गुच्छे में नहीं था। स्कूटर की चाबी कहाँ थी?

रिया ने बाबो के कमरे की तलाशी ली। उनकी पुरानी अलमारी, किताबों का ढेर, हर कोना छान मारा। आखिर में, एक पुरानी शर्ट की जेब में, उसे एक छोटी, जंग लगी चाबी मिली, जिस पर एक छोटा सा केले का निशान बना हुआ था। 'बानाना' – दूसरा शब्द!

चाबी से डिक्की खुली। अंदर एक पुरानी टिफिन बॉक्स था, जिसमें कुछ भी नहीं था सिवाय एक सूखे हुए केले के पत्ते के। पत्ता बिल्कुल सूखा था, किनारों से फटा हुआ, लेकिन रिया को याद आया – यह वही पत्ता था जिस पर बाबो अक्सर अपने हाथ से बनी चित्रकारियाँ बनाते थे, या रिया को कहानियाँ सुनाते हुए कुछ अजीब से सिम्बल्स बना देते थे। पत्ते पर पेंसिल से बारीक अक्षरों में कुछ लिखा था: "कुरीफ्तु – पेड़ के नीचे"।

अब तो रिया की धड़कनें तेज़ हो गईं। 'कुरीफ्तु' – तीसरा शब्द! और 'पेड़ के नीचे'। बाबो का बगीचा, जहाँ एक पुराना केला का पेड़ था, जो उनके बचपन से था। रिया भागती हुई बगीचे में पहुँची। केला का पेड़ अकेला खड़ा था, उसकी चौड़ी पत्तियां हवा में हिल रही थीं, जैसे बाबो का आशीष दे रही हों। रिया ने पेड़ के चारों ओर देखा, उसकी जड़ों के पास खोदा। कुछ नहीं। फिर उसकी नज़र पेड़ के तने पर पड़ी। वहाँ एक छोटा सा लकड़ी का डिब्बा, मिट्टी से सना हुआ, छुपाया गया था।

रिया ने डिब्बा खोला। अंदर एक छोटी सी, हाथ से बनी किताब थी। किताब के हर पन्ने पर बाबो की प्यारी लिखावट में छोटी-छोटी कविताएँ, चुटकुले और चित्र बने थे। और सबसे आखिरी पन्ने पर, एक खूबसूरत, रंगीन तस्वीर बनी थी – एक बजाज स्कूटर, केले के हरे-भरे पेड़ों के बीच, और उसके ऊपर एक उड़ता हुआ पक्षी, जिसके पेट पर 'कुरीफ्तु' लिखा था।


तस्वीर के नीचे बाबो ने लिखा था:

"बजाज ने मुझे यात्रा सिखाई, बानाना ने मुझे जीवन की मिठास दी। और कुरीफ्तु? कुरीफ्तु मेरी कल्पना थी, वो रहस्य जो मैंने हमेशा तुम्हारे लिए सहेजा। यह मेरी आखिरी यात्रा है, मेरी छोटी गुड़िया। मैं दूर गया हूँ, पर मेरी यादें, मेरा प्यार, तुम्हारी हर मुस्कान में रहेगा। इसे जियो। इसे फैलाओ। बस... बाबो गया।"

रिया की आँखों से आँसू बह निकले। यह कोई पहेली नहीं थी, यह कोई जादुई treasure map नहीं था। यह बाबो का प्रेम पत्र था, उनका जीवन दर्शन, उनकी विरासत। 'बजाज बानाना कुरीफ्तु' उनके जीवन के तीन सबसे प्यारे पहलुओं का प्रतीक था – उनकी यात्राएँ, उनकी मिठास, और उनका अद्भुत कल्पनाशील संसार।

बाबो सच में चले गए थे। लेकिन उन्होंने पीछे छोड़ दिया था अपनी यादों का एक घना जंगल, जहाँ हर शब्द एक फूल था और हर भावना एक सुगंध। रिया ने किताब को अपने सीने से लगा लिया। बाबो गए नहीं थे, वह बस एक नई यात्रा पर निकल पड़े थे, और उनका प्रेम उसकी आत्मा में हमेशा के लिए बस गया था। अब रिया जानती थी कि बाबो को खोजने के लिए उसे कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं थी, वह हमेशा उसके दिल में 'बजाज बानाना कुरीफ्तु' के रूप में मौजूद रहेंगे।


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